जो लोग पुनर्जन्म या आवागमन में विश्वास करते हैं, यह लेख उनके लिए है। पुनर्जन्म को आवागमन के अर्थ में लिया जाता है और इसमें एक कमज़ोर बात यह है कि हर जन्म से पहले एक जन्म मानना आवश्यक है, जिसके कर्मों का फल भोगने के लिए दूसरा जन्म हुआ। फिर उससे पहले का जन्म क्यों हुआ? वह उससे पहले के जन्म के कर्मफल भोगने के लिए हुआ। इस प्रकार हर जन्म से पहले एक जन्म मानना पड़ता है और कोई भी जन्म सबसे पहला जन्म नहीं कहलाता। इस आवागमन को मानने से यह स्पष्ट नहीं होता कि मनुष्य का पहला जन्म कब और क्यों हुआ? वैज्ञानिक बताते हैं कि धरती पर मनुष्यों से पहले पेड़ पौधे और पशु पैदा हुए? ये किस पाप की सज़ा भुगतते रहे जबकि अभी धरती पर मनुष्यों ने कोई पाप ही नहीं किया था? पहले मनुष्य होते, वे पाप करते तो वे पापी पेड़-पौधे और पशु-पक्षी बनते लेकिन विज्ञान ने सिद्ध किया है कि पहले पेड़-पौधे और पशु-पक्षी बने। उनके बाद धरती पर मनुष्य पैदा हुआ।
Rihan Khan Admin Quiz Group: Dr anwar jamal sahab assalamualaikum warahmatullahi wabarakatu क्या वेद अल्लाह ईश्वर का कलाम है या फिर वेदों में ईश्वर का कलाम है plzz खुलासा कीजिए. बड़ी मेहरबानी होगी क्योंकि बहुत से मुसलमान ये मानते है कि वेद अल्लाह का कलाम है और इसमें तौहीद है जैसे कि 'न तस्य प्रतिमा' वाला मंत्र दलील के तौर पर देते हैं. जवाब: W alykum assalam bhai. Kya main isi group mein yh baat nhi bata chuka hun ki Meri tehqiqi mein swami dayanand ka yh aqida ghalat h ki Ved parmeshwar ki Wani hain. *WORK* मिशन रामपुर के विद्वानों ने आर्य समाजियों का ग़लत अनुवाद देखकर ही यह ग़लत अक़ीदा बना लिया है कि 'वेद अल्लाह का कलाम है।' वेदों में दो चार सूक्तों भी अल्लाह की तौहीद का बयान मुझे नहीं मिला। ... लेकिन उसके बावुजूद भी वर्क रामपुर के अधिकतर लोग मेरी तहक़ीक़ को नहीं मानते। उनकी दलील यह होती है कि क्या आप मौलाना शम्स नवेद उस्मानी रहमतुल्लाहि अलैह और अल्लामा सैयद अब्दुल्लाह की बात को भी ग़लत मान सकते हैं?? इसी का नाम अंधी तक़्लीद और अंधभक्ति है। मैं यह काम न करता हूं और ...
Syed Shahroz Quamar sb की एक फ़ेसबुक पोस्ट पर निलय सिंह जी ने एक कमेंट किया था। जिस पर मैंने एक कमेंट किया। Nilay Singh जी, ऊँ शब्द को ओंकार कहते हैं और जब बैल बोलता है तो वह 'ओं ओं' की ध्वनि निकालता है। सो बैल के मुंह से निकला शब्द एक प्राकृतिक शब्द है। इसे किसी धर्म से जोड़ना ग़लत है। यह प्राकृतिक शब्द सबका है। प्राचीन काल में जिसके पास अधिक पशु होते थे, वह अधिक धनी व्यक्ति माना जाता था। सो 'ओं' शब्द समृद्धि का प्रतीक था। जिसे पशुपालक समुदाय शुभ मानकर हरेक शुभ कार्य के शुरू में बोलते थे। आज भी सब देख सकते हैं कि बैल क्या शब्द बोलता है? /// Syed Shahroz Quamar sb की फ़ेसबुक पोस्ट का लिंक: https://www.facebook.com/share/p/TWcC3wv2RUf3VMnw/?mibextid=oFDknk
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